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रूपम् अनुपम् सुंदर मनोरम् मन मोहनम् है श्रीमंत ख़्वाजा / Roopam Anupam Sundar Manoram Man Mohanam Hai Shreemant Khwaja

हिन्दुस्तान अस्ल में वलियों का देश है शाहों का नहीं बल्कि फ़क़ीरों का देश है सब अपने अपने सूबे के हैं चीफ़ मिनिस्टर अजमेर में रहता है इन का प्राइम मिनिस्टर रूपम् अनुपम् सुंदर मनोरम् मन मोहनम् है श्रीमंत ख़्वाजा प्रकाशरूपी है कंचन काया अति सुंदरम् है श्रीमंत ख़्वाजा शाह-ए-उमम च 'अली हैदरम् फ़ातिमा एवं हसनैन कुल सत्यम् भवत: पवित्रम् कुटुंब पंजतन अति पावनम् है श्रीमंत ख़्वाजा दयालु दयानंद दयावान दानी कृपालु कृपालम् है कृपाल निधि बड़े दान दाता बड़े दुःख-निवारक सख़ी सुंदरम् है श्रीमंत ख़्वाजा जननी पवित्रम् है उम्मुलवरा बी पित्र ग़्यासुद्दीं संजर निवासी सतगुरु प्राप्तम् है उस्मान-ए-हारूँ प्रिय दर्शनम् है श्रीमंत ख़्वाजा ईश्वर के प्रियतम महा दिव्य ज्ञानी रसूलस्य वचनम् कृत प्रतिनिधि भारत की धरती पवित्रम् भवति अभिनंदनम् है श्रीमंत ख़्वाजा छटी शुभ दिवस है अति पावनम् गाओ रे चिश्तियो ! मंगल गीतम् अजमेर नगरी भवत् स्वर्गरूपी शुभ मंगलम् है श्रीमंत ख़्वाजा जीवन का 'आसिम को वरदान दे दो, अपनी लगन का इसे ज्ञान दे दो तुमरी दुवरिया पे आस लगाए नतमस्तकम् है, श्रीमंत ख़्वाजा ! ख़्वाजा-ए-हिन्दल-वली,...

इस सदी में पीर ऐसा ढूँडते रह जाओगे / Is Sadi Mein Peer Aisa Dhoondte Rah Jaaoge

इस सदी में पीर ऐसा ढूँडते रह जाओगे सानी-ए-ताजु-श्शरी'आ ढूँडते रह जाओगे सारी दुनिया में है शोहरत उस रज़ा के लाल की हर तरफ़ वो ताज वाला ढूँडते रह जाओगे छोड़ कर अख़्तर रज़ा को इस जहाँ की भीड़ में रह-नुमाई करने वाला ढूँडते रह जाओगे वारिस-ए-'इल्म-ए-रज़ा हैं, नाइब-ए-आल-ए-नबी 'इल्म-ओ-हिकमत का ख़ज़ाना ढूँडते रह जाओगे इन के दामन को पकड़ लो आज, सुल्ह-ए-कुल्लियो ! हश्र में इन का सहारा ढूँडते रह जाओगे आज, बेख़ुद ! थाम लो तुम दामन-ए-अख़्तर-रज़ा वर्ना महशर में वसीला ढूँडते रह जाओगे शायर: वसीम बेख़ुद नात-ख़्वाँ: अब्दुल हफ़ीज़ क़ादरी उदयपुरी is sadi me.n peer aisa DhoonDte rah jaaoge saani-e-taaju-shsharee'aa DhoonDte rah jaaoge saari duniya me.n hai shohrat us raza ke laal ki har taraf wo taaj waala DhoonDte rah jaaoge chho.D kar aKHtar raza ko is jahaa.n ki bhee.D me.n rah-numaai karne waala DhoonDte rah jaaoge waaris-e-'ilm-e-raza hai.n, naaib-e-aal-e-nabi 'ilm-o-hikmat ka KHazaana DhoonDte rah jaaoge in ke daaman ko paka.D lo aaj, sulh-e-kulliyo ! hashr me.n in k...